प्रत्येक धर्म में रात्रि के समय श्मशान घाट में विचरण पर पूर्ण निषेध माना गया है. सनातन धर्म में भी रात्रि के समय श्मशान घाट में जाने की अनुमति नहीं दी जाती है.
श्मशान घाट वह जगह है जहां व्यक्ति का जीवन समाप्त होता है, वहां की मिट्टी अपने आप में हजारों लोगों को समा लेती है इसलिए स्पष्ट रूप से वहां कई प्रकार की ऊर्जा काम करती है.
मनोवैज्ञानिक तथ्य :– मनोविज्ञान के अनुसार किसी भी श्मशान घाट में नकारात्मक ऊर्जा अपने प्रबल स्तर पर होती है. विशेषकर रात्रि के समय यह नकारात्मक ऊर्जा कई गुना बढ़ जाती है.
इसलिए मानसिक रूप से कमजोर व्यक्ति किसी भी स्थिति में रात्रि के समय श्मशान घाट के पास से भी ना गुजरे. श्मशान घाट के पास से गुजरने में की वजह से व्यक्ति का खुद से काबू कई हद तक समाप्त हो जाता है और उसमें एक उच्च सीमा तक भय व्याप्त हो जाता है. मनोविज्ञान के अनुसार इस स्थिति में व्यक्ति के पागल होने की संभावना भी ज्यादा होती है.
गरुड़ पुराण के अनुसार :– गरुड़ पुराण में बताया गया है कि श्मशान घाट में कई तांत्रिक एवं अघोरी शक्तियों का जमावड़ा होता है. रात्रि के समय जब दुनिया में सभी लोग को विश्राम करते हैं.
तभी तांत्रिक लोग श्मशान घाट में जाकर अपनी अघोरी क्रियाएं करते है. यह मुख्य रूप से शमशान साधना, शिव साधना और शव साधना कहलाती है. तांत्रिक यहां मुख्य रूप से दैत्य शक्तियों को प्रसन्न करने के लिए क्रियाएं करते हैं.
तीनों में से सब साथ में सबसे भयानक मानी जाती है. इसके अलावा यह भी कहा जाता है कि शमशान घाट व्यक्ति के जीवन का अंतिम छोर होता है इसलिए यहां भगवान शिव भस्म लगाए साधना में लीन होते हैं, जबकि मां काली विकराल रूप में आत्माओं पर नजर रखती है.
इसलिए इस समय यहां जाना ठीक नहीं है. विशेषकर जिस व्यक्ति का ग्रह योग कमजोर हो एवं उसकी इच्छा शक्ति पर उसका वश ना हो ऐसा व्यक्ति यदि रात्रि के समय श्मशान घाट में विचरण करता है तो उसका जिंदा बच पाना भी मुश्किल है.